रविवार, 29 जुलाई 2012
बुधवार, 20 जून 2012
गजल
हम कहानी जीवन केर सुनाऊ कोना
करेज चिर कs घाऊ हम देखाऊ कोना
... नाम हुनके जपैतछि जे देलक दगा
द्गावाज प्रीतम सँ दिल लगाऊ कोना
चमकैत रूप पाछू जे भागल दीवाना
ओहन दगावाज के हम मनाऊ कोना
विछोडक पीड़ा सँ सुल्गैत अछि करेज
धुँवा धुँवा अछि जीनगी बताऊ कोना
विसरल नै जाईए ओ मिलनक पल
प्रीतमक ईआद दिल सँ भगाऊ कोना
जरल करेज में प्रेम जगाएब कोना
दिल में प्रेमक दीया आब जराऊ कोना
वर्ण-१५------
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट
हम कहानी जीवन केर सुनाऊ कोना
करेज चिर कs घाऊ हम देखाऊ कोना
... नाम हुनके जपैतछि जे देलक दगा
द्गावाज प्रीतम सँ दिल लगाऊ कोना
चमकैत रूप पाछू जे भागल दीवाना
ओहन दगावाज के हम मनाऊ कोना
विछोडक पीड़ा सँ सुल्गैत अछि करेज
धुँवा धुँवा अछि जीनगी बताऊ कोना
विसरल नै जाईए ओ मिलनक पल
प्रीतमक ईआद दिल सँ भगाऊ कोना
जरल करेज में प्रेम जगाएब कोना
दिल में प्रेमक दीया आब जराऊ कोना
वर्ण-१५------
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट
शनिवार, 9 जून 2012
गजल@प्रभात राय भट्ट
गजल
अप्पन जीनगी के अप्पने सजाएल करूअप्पन स्वर्णिम भविष्य रचाएल करू
राह ककर तकैत छि इ व्यस्त जमाना में
अप्पन राह के कांट खुद हटाएल करू
बोझ कतेक बनल रहब माए बाप कें
कर्मशील बनी कय दुःख भगाएल करू
असफलता सं लडै ले अहाँ हिमत धरु
कर्मक्षेत्र सं मुह नुका नै पडाएल करू
हार मानु नै जीनगी सं जाधैर छै जीनगी
जीत लेल अहाँ हिमत के बढ़ाएल करू
चलल करू डगर सदिखन एसगर
ककरो सहारा कें सीढ़ी नै बनाएल करू
उलझन बहुत भेटत जीवन पथ में
पथिक बनी उलझन सोझराएल करू
हेतए कालरात्रिक अस्त नव-प्रभात संग
अमावस में आशा के दीप जराएल करू
------------वर्ण -१६------------
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
गुरुवार, 7 जून 2012
गजल@प्रभात राय भट्ट
गजल
अप्टन सुन्दरता के बढ़ा रहल
छैपुष्प दूध सं सुनरी नहा रहल छै
कोमल कोमल देह लागैछै दुधिया
आईख सं बिजुरिया गिरा रहल छै
पैढ़लिय इ सुनारी छै खुला किताब
अंग अंग सुन्दरता देखा रहल छै
पातर पातर ठोर लागै छै शराबी
गाल गुलाबी रस टपका रहल छै
घिचल घिचल नाक चमकै छै दाँत
काजर के धार तीर चला रहल छै
अप्टन लगा गोरी सुनरी लागै छै
मोन मोहि पिया के ललचा रहल छै
दुतिया चान सन चकमक करै छै
ताहि ऊपर श्रृंगार सजा रहल छै
सैज धैज सजनी इन्द्रपरी लागै छै
देख सुनरी के चान लजा रहल छै
-------वर्ण-१४-------
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट
सोमवार, 4 जून 2012
गजल@प्रभात राय भट्ट
गजल
मरि रहल
छै सीता सन बेट्टी दहेजक खेल में बेट्टी पुतोहू जरी रहल छै किरोसिन तेल में
बेट्टा के बाप बेचीं रहल छै मालजालक मोल में
बेट्टीबाला के घर घरारी सब लागल छै सेल में
कs देलन घर घरारी दुलहा के नाम नामसारी
बनी गेलाह ओ दाता भिखारी बाप बेट्टा के मेल में
फेर दुलहा मोटर आ गाड़ी लेल कटैय खुर्छारी
कनिया संग आबैय ओ ससुरारी चैढ कS रेल में
नै भेटला सं मोटर गाड़ी कनिया के देलक मारि
दहेजक लोभी ओ बाप बेट्टा चकी पिसैय जेल में
------------वर्ण-१९-----------
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट
गजल@प्रभात राय भट्ट
गजल
प्रेमक दुनियाँ में संसारक रित धनी तोईर दियशराबी ठोरक रस हमरा ठोर पर घोईर दिय
प्रेमक बैरी इ दुनिया की जाने प्रेम सनेहक मोल
अनमोल प्रेम सं दिल टूटल हमर जोईर दिय
अहिं हमर जिनगी छि हम अहिं प्रेम केर दीवाना
दिल लगा कs हमरा सं जमाना के पाछु छोईर दिय
प्रेमक पंछी हम अहाँ उईर चलू प्रेम नगर में
कियो देखैय खराप नजैर सं ओकर मुह मोईर दिय
अप्पन प्रेम देख क दुनिया जैईर जैईर मरतै
प्रेमक दुश्मन जमाना के अहाँ धनी झकझोईर दिय
-----------वर्ण-२०------------
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट
शुक्रवार, 1 जून 2012
गजल
सब दान सं पैघ दुनिया में कन्यादान छैधन टाका सं पैघ दुनिया में स्वाभिमान छै
निर्लज मनुख की जाने मान-स्वाभिमान
दहेज़ मांगब याचक केर पहिचान छै
मांगी दहेज़ टाका रुपैया देखबैय शान
बेचदैय बेट्टा के लोक केहन नादान छै
जैइर मरैय बेट्टी दहेजक आईग में
विआहक नाम सुनीते बेट्टी परेशान छै
सपथ लिय बंधू दहेज़ नै लेब नै देब
आदर्श विआह जे करता ओहे महान छै
आब नै बेट्टी मरत नै पुत्रबधू जरत
दहेज़ मुक्त मिथिलाक एही अभियान छै
---------वर्ण-१६-----------
रचनाकार-प्रभात राय भट्ट
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